चाँद से कह दो मनोज कुमार निषाद चाँद से कह दो,हम उस मिट्टी के जाबाज़ हैं,कर मस्तक ऊँचा,तुमको भी काबू में लायेंगे,छूने निकले थे,तेरे दामन की शीतलता,ना पहुँचे इस बार,तो क्या ग़म,तेरे प्यार में हमलौट के दुबारा आएँगे।।