लड़ो दुश्मन से मुहम्मद आसिफ अली लड़ो दुश्मन से अगर जान बाक़ी हैतोड़ो पहाड़ अगर अरमान बाक़ी है। तुम्हारी मेहनत भी कभी रंग लाएगीअरे तुम्हारी क़िस्मत भी इतिहास बनाएगी। जो पहले थे वो भी इंसान थेख़ुद से डरने वाले बताओ कब महान थे। ये बीती ज़िन्दगी एक दिन याद आएगीगुज़री हुई बात फिर तुमको रुलाएगी। अभी कर लो शुरू अगर आगे बढ़ना हैइस छोटी ज़िन्दगी में अगर कुछ करना है। चलो आओ अभी कुछ काम बाक़ी हैदुनिया में बनाना अभी नाम बाक़ी है।