सोचती हूँ डॉ प्रिया सूफ़ी सोचती हूँकिसी दिन पी लूंतुम्हारे होठों की मयएक ही सांस मेंऔर कूद जाऊंतुम्हारी आँखों कीपनीली झील मेंतुम पुकारो मुझेमेरा नाम लेकरऔर मैं घुल जाऊंतुम्हारी साँसों कीगहरी नील में ….!