आत्म चिंतन

मनाया तो इस बार भी जाएगा
स्वतंत्रता दिवस
फहराएगा फिर से तिरंगा
अनेक रंगों में फैली उमंग
गूंजेगी खुशी की ध्वनि से
राष्ट्रगान इस बार भी
करेगा नई दस्तक
उसी भाव के अंतः स्रोत से
स्वाभिमान मिलेगा।

पर क्या रहेगा केवल
झंडा ही गवाह
देशभक्ति की परंपरा का?

राम मंदिर और काशी विश्वनाथ
के पुनर्निर्माण की साक्षी
बनेगा तिरंगा
तीन तलाक और धारा 370
से निजात पाकर मुस्कुराएगा
और हमारा किसान
सूखा नहीं सहेगा
जान जाएगा
सपने चरेंगे और देंगे
विकास स्वर
कश्मीर, अयोध्या नगरी,
देशांतरों नागरिक से
गौरव उठेगा।
कुकृत्यकारी निंदकों
जिस मानसिकता से
परहेज कर लाएंगे नई स्फूर्ति
क्योंकि अब पथ पर
अब घटेगा भ्रम
उपेक्षा, संकुचन
नियम, मर्यादा, निष्ठा
आत्म चिंतन, आत्म निरीक्षण
जरूरी है
अब नहीं वह स्थिति कि
पलायन करना विकल्प होगा
बुद्धि, कौशल और दृष्टिकोण
अब नया मुकाम तय करेगा।
क्या बदलें से पहले
स्वयं को बदल पाएंगे?
नहीं? यह भी सच है
स्वतंत्रता तब सच्ची
स्वीकृत तब जब उसे समझा
होगा। और समझना होगा।