सुकोमल हूँ अबला नही हूँ घर बाहर दोनो ही संभालती हूँ। मैं ही सीता मै ही दुर्गा मैं ही लक्ष्मीबाई हूँ । धीरज धैर्य की बात चले तो राधा रूक्मणी मीराबाई हूँ ।
माँ बहन बेटी पत्नी बनकर इस जग मे आई हूँ ।
समय बदला नारी का परिवेश बदला सुष्मिता कल्पना साइना बनकर छाई हूँ ।
आसमान मे उड़ती सीमा पर लड़ती हर क्षेत्र मे गौरव बढ़ाती हूँ ।