शब्दों की दुनिया में, अर्थों का कोई वजूद नहीं है। कलम की स्याही और बहता रक्त एक है। मनुष्य जीवन माटी का घड़ा नहीं, उसमें रखा पानी है जो कभी लाल हो जाता है कभी नीला पड़ जाता है। मुक्ति के मार्ग में बुद्धि का कोई प्रयोग नहीं है। सब बुद्ध हैं, कोई भी बौद्ध नहीं है।