नारीवाद

निकल आएगा शरीर से
मांस का एक टुकड़ा 
उसके जैसा ही।
नहीं होगा उसका मस्तिष्क,
नहीं होगा उसका हृदय।
होगी बस योनि –
लाएगी यौनिकता का भय।
उसके केश सर्पों के गुच्छे होंगे,
बाँधा जाएगा रबर से।
उसकी छाती पर ज्वालामुखी फूटेगा।
उसका शरीर लावे में बदल जाएगा।
वह बन जाएगी घातक।
वह शस्त्रहीन स्त्री –तब भी घातक।
वह वस्त्रहीन स्त्री –तब भी घातक।
वह पवित्र/दीन स्त्री –तब भी घातक।
गुफा से निकलेगी,
चिल्लाएगी–
नारीवाद नग्नता नहीं –
अपने अनुसार साँस लेना है।