मैं मनुष्य थी राजनंदिनी रावत संभोग आत्म-खोज हैमैंने उससे कहा—वह एक जोड़ी स्तन और योनि के बीच रहामैं आत्म-खोज से मनोविज्ञान की ओर बढ़ गईवह चला गयामैं लेटी थीमैं शब्द शून्य थीभाव शून्य थीमैं दो स्तन थीमैं एक योनि थीमैं स्त्री थीमैं मनुष्य थी ।