स्त्री, स्त्री को पुकार रही है अपनी लड़ाई लड़ने के लिए नहीं! वह पुरुषों को नहीं पुकार रही आज से सदियों पहले स्त्री और पुरुष मनुष्य ही थे लेकिन तुमने उन्हें खेमों में बाँट दिया अब वह अपने खेमे की मालिक बनना चाहती है नहीं! वह तुम्हें नौकर नहीं बनाना चाहती अब वह चाहती है सब कुछ बराबर सारे समीकरण बराबर अब वह तुम्हारे प्लस के लिए माइनस नहीं होना चाहती।