कायरता पर सोने की परत
कितने अजीब हैं
ये इतिहास के वीर
हर युद्ध में हारकर भी
विजय की कथा लिख लेते हैं
दीवारों पर लटका लेते हैं
विजय का प्रमाण पत्र।
सिकंदर लौट गया तो
कह दिया
हमने डराया था,
हम कौन?
जो जंगलों के योद्धाओं की जीत
अपने नाम लिखते रहे।
हर आक्रमण के समय
किले नहीं गिरे,
सबसे पहले गिरी थीं
शान की ऊँची-ऊँची आवाजें;
तलवारें बाद में टेढ़ी हुईं।
औरतों पर,
दलितों पर,
मजलूमों पर
गरीब किसानों पर
बहादुरी की तलवारें चमकाईं,
और फिर
अफग़ानों, तुर्कों, मुगलों
और अंग्रेजों के सामने साहस
बिल्लियों की तरह काँपता रहा।
पराजय के ढेर पर बैठकर
इन्होंने ईंट-ईंट जोड़ा
एक अद्भुत मिथक
वीरता का,
जो सिर्फ कमजोरों के सामने
शेर बनता है।
इतिहास हँसता है
इन वीरों पर
जो हर हारी लड़ाई के बाद
नई कहानी गढ़ते हैं,
और हर कहानी में
अपनी कायरता को
सोने की परत चढ़ाकर
हमेशा की तरह
चमका देते हैं।
