अंधेरे कमरे में

अंधेरे कमरे में
उजाला छिपा हुआ है
सूरज!
समन्दर का वह हिस्सा
जहां लहरें आतीं तो हैं
पर डूबता नहीं
यह टापू
सदियों पहले कभी
यह दिखता नहीं था
कि कभी कोई
आया भी होगा
यहां
रेत बताता नहीं
तेरे इशारे पे
सारे के सारे कपड़े उतार दिए
पत्ता पत्ता जलाकर
तब रोशनी कर रहे हो
उस मोड़ से ही गुजरता है
रुकता है
कोई एक रास्ता
साफतौर देखा जा सकता है
गुजरना है जुगनुओं के उजालों में
तुम्हें देखता
तुम हो कि अब भी ओस की बूंदों से
मेरे बदन को सजा रहे हो
इक रोटी व लाश
दोनों ही सड़े मिल गये
चलते चलते सड़क पे
पैसे पड़े मिल गये
भीतर तुम्हारे प्रेम तलाशता
महसूस करता दीप जलाता
स्वप्न देखता
लिख रहा हूँ खत
कुछ अल्फ़ाज़ उधार दे दो जानेमन
जो दिखाया
देखा
वह अब नहीं दिख रहा है
तू ही मुझे भी राह दिखायेगा
उसे दिखा रहा है
गिद्धों की टोली मे मैना क्यों बोली रे
तू खाले सखी माला की इक गोली रे
खत लिखूं तुम्हें
लिख रहा हूँ
लिखतें रहा हूँ
कुछ खत पोस्ट भी किये
गंगाजल बिकने लगा है
मेल वाट्सएप फेसबुक चैटिंग होता भी रहा
किरदार निभाया है
लेकिन अब आप
अपने घर का नाम बताओ
आकाश का नाप लेकर आना
बारिश बहुत हो रहा है!