सर झुकाऊँ कैसे

दर्द कितना है इस दिल में बताऊँ कैसे,
मुस्कुराती आँखों के आँसू दिखाऊँ कैसे,
मंज़िल सामने है मेरे, रास्ता मुश्किल बहुत,
इन मुश्किलों को राहों से हटाऊँ कैसे,
मुस्कुराती आँखों….

ज़िन्दगी दौर है अब बेबसी का,
है बेबसी ही साथ मेरे
इन मायूस आँखों में
उम्मीदों की लौ जलाऊँ कैसे
मुस्कुराती आँखों….

लाख घटाएँ छुपाएँ तारे आकाश में,
कामयाबी का सितारा है मुठ्ठी में मेरे,
हूँ “अपराजिता “नहीं मैं सिर्फ नाम की,
चंद ग़मों के आगे सर झुकाऊँ कैसे
मुस्कुराती आँखों के आँसू दिखाऊँ कैसे…!!