आवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है
आवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है,
हर वक़्त आँखों में अब नमी-नमी सी है।
वक़्त अब तन्हां गुजरने लगा है
हर लम्हें में तेरी ही कमी–कमी सी है ,
आवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है।
सर्द मौसम की सर्द हवाएं भी अब
आग दिल में मेरे यूँ लगाने लगी हैं
कतरा–कतरा पिघलता है दिल मेरा
याद तेरी मुझे यूँ जलाने लगी है
मर जाएं न हम तेरी याद में सनम
तेरे इंतज़ार में ये साँसें थमी-थमी सी हैं
आवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है।
स्मृति के पन्नों पर हर–पल
तेरी यादों के अक्स उभरते हैं
हृदय वेदना के करुण स्वर
आँखों से निर्झर बहते हैं
तुम आओगे इस आस में
नज़रें राहों पर जमी-जमी सी हैं
आवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है।
हृदयगति अब मंद हो चली
साँसें भी हैं बोझिल-बोझिल
खामोश हो रही धड़कन मेरी
अँखियाँ भी हैं झिलमिल-झिलमिल
अब आकर मुझको बाहों में भर लो
साँसें अब मेरी रुकी-रुकी सी हैं
आवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है।
