राजा तानाशाह शिव नारायण जितना चाहे फेंक दो, फेंक सके तो फेंक। फेंक अगर सत्ता मिले, फेंक फेंक दिल सेंक॥गैस में है आग लगी, दुनिया बेपरवाह। तुम भी केवल फेंकते, जनता भरती आह॥सीना छप्पन इंच का, करते कुछ न कमाल। तेल गैस के खेल में, जमाखोरी धमाल॥दोस्त तेरे खेल रहे, युद्ध युद्ध के खेल। तुम तटस्थ रहते हुए, कर रहे स्वांग मेल॥महंगाई सुलग रही, घर में तेरे आज। तू सत्ता की चाशनी, डूब डूब कर राज॥ऐयाशी में चूर हो, राजा तानाशाह। जगी हुई जनता करे, बर्बर सत्ता दाह॥