पटना के लोकप्रिय कवि श्री शिवनारायण एक अनन्य ईश्वर-प्रेमी और साधक हैं। उनकी रचनाओं में उनके भीतर का अटूट भक्ति भाव और पूर्ण समर्पण साफ झलकता है। उनके लिए ‘रब’ ही एकमात्र रक्षक, मार्गदर्शक और ढाल हैं, जो उनके मन की हर बात जानते हैं। वे इस संसार को एक ‘जाल’ यानी मोह-माया का बंधन मानते हैं, जिससे मुक्ति केवल ईश्वर की कृपा से ही संभव है। उनकी भाषा अत्यंत सरल, सहज और गेय है। वे किसी कठिन दार्शनिक उलझन के बजाय “रब रब” के सरल सुमिरन को जीवन का परम लक्ष्य मानते हैं, जिससे संसार के सभी दुखों और काल के भय को आसानी से टाला जा सकता है।
