तुम से आप डॉ अशोक चक्रधर तुम भी जल थेहम भी जल थेइतने घुले-मिले थेकि एक दूसरे सेजलते न थे।न तुम खल थेन हम खल थेइतने खुले-खुले थेकि एक दूसरे कोखलते न थे।अचानक हम तुम्हें खलने लगे,तो तुम हमसे जलने लगे।तुम जल से भाप हो गएऔर ‘तुम’ से ‘आप’ हो गए।