डॉ हरिवंश राय बच्चन

जीवन परिचय

हरिवंशराय बच्चन का जन्म 27 नवंबर, 1907 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के नजदीक प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव ‘पट्टी’ में एक साधारण मध्यवर्गीय कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘प्रताप नारायण श्रीवास्तव’ एवं उनकी माता का नाम ‘सरस्वती देवी’ था। बचपन में उनके माता-पिता उन्हें प्यार से ‘बच्चन’ कहकर पुकारते थे। हालांकि हरिवंशराय बच्चन का सरनेम असल में ‘श्रीवास्तव’ था, पर उनके बचपन से पुकारे जाने वाले नाम की वजह से उनका सरनेम ‘बच्चन’ हो गया। आगे चल कर यही उपनाम दुनियाभर में प्रसिद्ध हुआ।
हरिवंशराय बच्चन की आरंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव की पाठशाला में हुई। फिर उच्च शिक्षा के लिए वे इलाहाबाद गए और वर्ष 1925 में हाई स्कूल पास किया तथा साल 1929 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में बी.ए. की डिग्री हासिल की। इस दौरान कई तरह की नौकरियाँ करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1941 से 1952 के बीच अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे रिसर्च के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए, जहाँ उन्होंने अंग्रेजी साहित्य के विख्यात कवि डब्लू बी यीट्स (W.B. Yeats) की कविताओं पर शोध किया और डॉक्टरेट की उपाधि ली।
वर्ष 1926 में हरिवंश राय बच्चन जी का विवाह ‘श्यामा’ से हुआ। किंतु टीबी की लंबी बीमारी के बाद साल 1936 में श्यामा का देहांत हो गया। फिर पांच वर्ष बाद 1941 में हरिवंश राय बच्चन ने ‘तेजी सूरी’ से विवाह किया, जो रंगमंच तथा गायन से जुड़ी हुई थीं। वहीं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दिग्गज फ़िल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन और उद्योगपति अजिताभ बच्चन उनके पुत्र हैं। तेजी बच्चन भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की काफी करीबी दोस्त थीं।
हरिवंश राय बच्चन ने आधुनिक हिंदी साहित्य की कई विधाओं में अनुपम कृतियों का सृजन किया हैं। बच्चन जी व्यक्तिवादी गीत कविता या हालावादी काव्य के अग्रणी कवि थे। उन्हें हिंदी का उमर ख़य्याम (Omar Khayyam) और जन कवि भी कहा गया है। उन्होंने लगभग एक लाख चिट्ठीयां अपने चहेते प्रशंसकों को लिखीं थीं, जो कालांतर में विशिष्ठ साहित्यिक धरोहर बन गई। ‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ (आत्मकथा) व मधुशाला (काव्य-संग्रह) हिंदी साहित्य जगत की अमूल्य निधि मानी जाती है।
हरिवंश राय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan Ka Jeevan Parichay) को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए सरकारी और ग़ैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा कई पुरस्कारों व सम्मान से पुरस्कृत किया जा चुका है, जो कि इस प्रकार हैं:-
• वर्ष 1966 में हरिवंश राय बच्चन जी को हिंदी साहित्य जगत में अपने अविस्मरणीय योगदान देने के लिए राज्यसभा में मनोनीत किया गया।
• भारत सरकार द्वारा हरिवंश राय बच्चन जी को वर्ष 1976 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया।
• वर्ष 1965 में प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘दो चट्टानें’ के लिए उन्हें सन 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
• के. के बिरला फाउंडेशन का प्रथम सरस्वती सम्मान
• सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार
• एफ्रोएशियन राइटर्स कॉन्फ्रेंस का लोटस पुरस्कार
• हिंदी साहित्य सम्मलेन का वाचस्वति सम्मान भी मिला।
हरिवंश राय बच्चन का 95 वर्ष की आयु में 18 जनवरी, 2003 को मुंबई में निधन हुआ। लेकिन साहित्य जगत में वे आज भी अपनी लोकप्रिय कृतियों के लिए विद्यमान हैं।

प्रकाशित पुस्तकें

  • तेरा हार-1929
  • मधुशाला-1935
  • मधुबाला-1936
  • मधुकलश-1937
  • आत्म-परिचय-1937
  • निशा निमंत्रण-1938
  • एकांत संगीत -1939
  • आकुल अंतर-1943
  • सतरंगिनी-1945
  • हलाहल-1946
  • बंगाल का काल-1946
  • खादी के फूल-1948
  • सूत की माला-1948
  • मिलन यामिनी-1950
  • प्रणय पत्रिका-1955
  • धार के इधर-उधर-1957
  • आरती और अंगारे-1958
  • बुद्ध और नाचघर-1958
  • त्रिभंगिमा-1961
  • चार खेमे चौंसठ खूंटे-1962
  • दो चट्टानें – साहित्य अकादमी से पुरस्कृत (1968) -1965
  • बहुत दिन बीते-1967
  • कटती प्रतिमाओं की आवाज़-1968
  • उभरते प्रतिमानों के रूप-1969
  • जाल समेटा-1973
  • नई से नई-पुरानी से पुरानी-1985
  • क्या भूलूँ क्या याद करूँ-1969
  • नीड़ का निर्माण फिर-1970
  • बसेरे से दूर-1977
  • दशद्वार से सोपान तक-1985

प्रतिनिधि रचनाएं