अब महासंग्राम होगा
सोचा भी नहीं होगा तूने,
युद्ध का वो अंजाम होगा।
समझौता नहीं होगा अब,
अब तो महासंग्राम होगा।
युद्ध का जब आगाज़ होगा,
तब तो तू बर्बाद होगा।
तेरी हर ईंट का पत्थर
हमारा जवाब होगा,
लहू के कतरे कतरे का,
अब हिसाब होगा।
सामना करेंगें तेरा हम तो डटकर,
चाहे लौटें जिंदा या तिरंगे में लिपटकर।
शहीदों की शहादत नहीं जाएगी बेकार
आत्मनिर्भरता भी बनेगी अब हमारी औजार।
धधक उठी है दिल में आग,
अब करेंगे तेरा बहिष्कार,
जंग का अब होगा आगाज़,
दिखा देंगे तुझे तेरी औकात।
हमारी सैन्य शक्ति का तुझे,
तनिक भी नहीं अंदाज़ होगा।
हमारे सैन्य हौसले की आग में जलकर,
तू एक दिन राख होगा।
युद्ध नहीं ये विराम होगा,
समझौता नहीं अब तो महासंग्राम होगा।
