बेताब सा हूँ
बेताब सा हूँ इश्क में, चलने लगा हूँ चाहतों की पगडंडियों पे
तू मिलने भी आ जाना पिया बैरना, तुमसे मिलन की बेताबियां है।
अभी चाँद आया है मेरे आँगने में, वो पिया छुप के तुम्हें देख लूं
तू छाना बलमा जो मदहोश होकर, करने देना जो नादानियाँ है।
हरकतें इश्क में रिश्क लूं, कर लूं हरकतें बहकी बहकी सनम
करना सितम ऐसे मुझसे सनम, कहना चाहूं दिल में बेबाकियाँ है।
आज तो इश्क का लिहाफ ओढ लूं, धीरे-धीरे तेरा हो भी जाऊँ
तेरे जुल्फों की वादियां घूम लूं, सनम हूँ तेरा मेरी गुस्ताखियाँ है।
तू ओढ के लाली चूनर आ पिया मेरे आँगना,चाँद खिलने लगा
कांटा सा मेरे दिल में चुभा इश्क का, तेरे लिए बढ़ी बेकरारियाँ है।
शाम से तेरे लिए दिल के सेज पे, करीने से लगाया गुलदस्ता पिया
धीमी सी भी आहटों से बेचैन हूँ,दिल में समाई हुई हैरानियाँ है।
तू बलमा मेरा, हूँ बेताब सा तेरे लिए बिखर ना जाऊँ तेरे इश्क में!
तू सजाना सही मेरे इश्क को बन के बागवा,तेरे लिए बेताबियाँ है।
