तेरे जरा-जरा समझाने से

तेरे जरा-जरा समझाने से,
थोड़े थोड़े नैना उलझाने से,
मोहे रोग लगी पिया अटपट सी,
मैं चलती तेरे सांसो में जी आया,
तेरे होंठ भरे पिया मदिरा से,
मैं तेरे होंठों का प्याला पी आया।

मोहे और मोहे और पिला,
मोहे पिला दे शाकी जी भर के,
मोहे आज नाचना तेरी चाहत में,
मोहे संग झूमा ले जी भर के,
तेरे होंठों के अंगारों पे अपना,
बालम रे मैं तपता- तपता जी आया।

आज मुझे तो होश नही
मैं मदहोश हुआ,
शाकी- शाकी बस जपन किया,
लगी आग हैं इश्कन की
बेहोश हिया,
मैं प्रेम का जोगी बन कर
जतन किया,
जो उठा लहरी राग प्रेम तमुरे से,
जाना था कहीं मैं पिया कही आया।

तेरे इश्क की ऐसा तूफान चलाने से,
मैं उड़ा मेरा जप जोग जतन उड़ा,
तेरे जरा-जरा पास मेरे जो आने से,
मेरी टूट पड़ी तप की ज्ञान धुरी,
तू जो आँचल को लहराती सोन कुड़ी,
मेरे इश्कन का यार समय यही आया।

मैं प्रेम राग का जोगी रे योग किया,
तेरे मेरे मिलन का है संजोग पिया,
तू अब मांग के देखो जी भर के,
कहें कैसे तेरे चाहत का मुझको रोग पिया,
अब तो इश्क शरारत करते-करते,
मैं चला दो चार कदम पे ही तेरी गली आया।