ओ मेरे वतन
ओ मेरे वतन ! ओ मेरे वतन !
ओ मेरे प्यारे वतन, तू मेरा जीवन
एहसासों में तुम हो,जैसे हो दिल की धङकन
तुमसे ही है एहसास मुझे अपनापन का
तुमसे ही है श्रृंगार वतन इस जीवन का
खुशबू बन खिलता है तुमसे अभिमान मेरा ।
तेरा रूप-रंग अलौकिक है, सागर चरण प्रछाल करें
गिरिवर राज हिमालय मुकुट से तेरे भाल पड़े
तेरे बांहों सी बन, बहती नदियों की धारा नित दिन
वन-बाग वाटिका मानो तेरे गले में तेरे माल पड़े ।
तुमसे ही तो है दारोमदार इस जीवन का
कैसे चुप मैं रहूँ, ऐ मेरे वतन ! तू ही है पहचान मेरा ।
ओ मेरे वतन ! ओ मेरे वतन !,
श्वेत धवल से वस्त्र तेरे
वेदों-पुरानों के निर्मल मंत्र है जो अस्त्र तेरे
वीर बांकुरे लाल तेरे, तेरे कण-कण में लोट के खेले हैं
है वीर साहसी जो, वो अहले वतन है शस्त्र तेरे ।
तुमसे ही तो है आधार मेरे वतन इस जीवन का।
मैं ये कैसे ना कहूं, तू ही तो है होंठों की मुस्कान मेरा।
तेरे आँचल के लहराने से, आनंद का राग निकलता है
तेरे कण-कण के मुस्काने से, ये आवाज निकलता है
तुम जरा जो क्रोधित होते हो, वीर का राग निकलता है
तेरी टेढ़ी नजर की ज्वाला से, दुश्मन का आह निकलता है।
कर दूं वार-वार तुम पर निछावर इस जीवन का
ऐ मेरे वतन ! तू ही है अभिमान मेरा,तू ही है अरमान मेरा।।
