एक तू है कि अर्चना राठौर एक तू है कि जिसे जरा सा भी परवाह नहीं मेरी और एक मैं हूँ जोकि सिर्फ परेशान हूँ तेरे लिए।एक तू है जोकि मेरी राहों में चलने को तैयार नहींऔर एक मैं हूँ जोकि सिर्फ निगहबान हूँ तेरे लिए।एक तू है जिसे मेरे गुलशनकी जरा परवाह नहींकभी तुम्हे मुरझाने न दूंऐसा बागबान हूँ तेरे लिए।दुनिया की नजरो में एकअक्लमंद इंसान हूँ मैं भीपर इश्क आशिकी काअसर है, नादान हूँ तेरे लिए।एक तू है जिसकी नज़रोंमें मेरी नहीं है कोई क़दरएक मैं हूँ ये सब जानकरभी कदरदान हूँ तेरे लिए।