एक तू है कि

एक तू है कि जिसे
जरा सा भी परवाह नहीं मेरी
और एक मैं हूँ जोकि
सिर्फ परेशान हूँ तेरे लिए।

एक तू है जोकि मेरी राहों में
चलने को तैयार नहीं
और एक मैं हूँ जोकि
सिर्फ निगहबान हूँ तेरे लिए।

एक तू है जिसे मेरे गुलशन
की जरा परवाह नहीं
कभी तुम्हे मुरझाने न दूं
ऐसा बागबान हूँ तेरे लिए।

दुनिया की नजरो में एक
अक्लमंद इंसान हूँ मैं भी
पर इश्क आशिकी का
असर है, नादान हूँ तेरे लिए।

एक तू है जिसकी नज़रों
में मेरी नहीं है कोई क़दर
एक मैं हूँ ये सब जानकर
भी कदरदान हूँ तेरे लिए।