सन्नाटे का शोर
सन्नाटे का शोर आज बहुत मेरे दिल में है दोस्तों,
मैंने तो बरसों किसी से कभी कोई बात नहीं की।
उनसे मिलने की तलब दिल में आज भी बहुत है,
मेरी गली से गुजर के वो मुझसे मुलाकात नहीं की।
आज भी वो हमें दिल की गहराइयों में अज़ीज़ है,
ये कैसे हो सकता है उन्हें दिल से आवाज़ नहीं दी।
उनकी यादों के सहारे काट दी मैंने मेरी उम्र सारी,
तसल्ली देने के लिए ही सही कभी याद नहीं की।
अब तक जिंदगी के सफर में वो था हमसफर मेरा,
मैं जिंदगी में उनके शिवा किसी पे नाज़ नहीं की।
वो जहाँ कहीं भी रहे खुश रहे जीवन के सफर में,
प्रभु आबाद कर उसे जिसने मुझे दुआ-ए-आबाद नहीं की।
