तुझे याद करते करते

मैं मर के जी रही हूँ तुझे याद करते करते,
मैं फिसल न जाऊँ ख़्वाब में चलते चलते।

बारिश में मिलने की वादा कैसे करूँ पूरा,
घर भी मुझको है जाना शाम ढलते ढलते।

कब तलक तड़प तड़प के मैं जीती रहूँगी,
तेरी ही जुदाई की ये आग में जलते जलते।

तुमसे मिलने की आस कभी न होगी पूरी,
ये जिंदगी कटेगी महज़ आहें भरते भरते।

अब कहीं ये ख़्वाब अधूरा ही रह न जाए,
कब तक जियेंगे एक दूजे से लड़ते लड़ते।

आओ दोनों मिलकर करें ख़्वाहिशें पूरी,
जिंदगी है मिली दोबारा बचें हैं मरते मरते।