उनकी यादें अर्चना राठौर अपनों के साथ बिताई घड़ियाँ लौटकर नहीं आती है, मगर हर रोज़ उनकी यादें तरोताज़ा कर जाती हैं।वो दिलकश हंसी, वो मीठी बातें, वो सुनहरी शामें उनसे जुदा होकर भी तन्हाई में साथ निभाती हैं।कभी रात को ख़्वाबों में, कभी उनके ख़यालों में, बीते हुए जिंदगी की कहानी फिर से दोहराती है।इस तन्हा जिंदगी में बस एक उनकी यादें ही हैं, जो अक्सर ख़ामोशी में भी बहुत शोर मचाती है।