मेरे  जज़्बात को समझे

कोई तो ऐसा हो जो मेरे अल्फ़ाज़ को समझे
शिद्दत से जिनकी कद्र करूं मेरे  लिहाज़ को समझे।

कुछ लोग इश्क में इज़हार करने में देरी नहीं करते
मैं खामोश पसंद हूँ कोई तो मेरे  जज़्बात को समझे।

ये जहां के लोग दूसरों को बदनाम करने में हैं माहिर
कोई मेरी मौन स्वीकृति करने की रिवाज़ को समझे। 

माना पुरुष प्रधान दुनिया में महिलाओं की क़दर नहीं
जिसने हमारे कल को न समझा वो आज को समझे। 

कोई नहीं जहां में मोहब्बत भरा दिल से नफरत करे
खोज है मुझको जो मेरी दिल की आवाज़ को समझे।