मोहब्बत न करना
दीवानों की निगाहों से बच के रहो, इनसे मोहब्बत न करना
नज़रों से होता है इश्क़ शुरू, हो जाए तो शिकायत न करना।
इश्क़-मोहब्बत की राह में दर्द-ओ-सितम तो मिलते ही रहते हैं
जब कर लिया दिल से इश्क़ हमसे, फिर कभी अदावत न करना।
गर कहीं दिल में डर है तो तौबा कर ले अभी भी मोहब्बत से
क़दम बढ़ाके मुँह फेर कर, किसी के लिए मुसीबत न करना।
अपने आशिक़ के प्यार को, उनके ऐतबार को भी समझना
क़यामत आ जाए भले खुदी पे, अपनों पे तोहमत न करना।
इश्क़ में सुकूँ खोने की नौबत आए, बेचैन तबीयत न करना
और जो तोड़े दिल तेरा, उन पे कभी नज़रें इनायत न करना।
