शुक्रिया उस इंसान का अर्चना राठौर ज़्यादा की ख़्वाहिश नहीं दुनिया में हम जैसे नादान को,बस चार दिनों की ज़िन्दगी में कमी न हो क़दरदान का।औरों के दिल की मंशा क्या है, अपने दिल की वो जानें,गिरने से जिसने हमें बचाया, शुक्रिया ऐसे मेहरबान का।तन्हा सफ़र, बियाबान डगर, ज़िन्दगी की अंधेरी राहों में,हमसफ़र बन राह दिखाई, शुक्रिया ऐसे निगहबान का।तन-मन दिया, धन दिया, इज़्ज़त-शौहरत से नवाज़ा हमें,जहाँ में जीने के क़ाबिल बनाया, शुक्रिया उस इंसान का।