पहले जैसा प्यार न रहा अर्चना राठौर उनको अब शायद मुझसे पहले जैसा प्यार न रहावर्ना उनके हाथों की गिरफ़्त कभी नहीं ढीली होती।उनकी निगाहों में शायद अब मैं उम्रदराज़ हो चलीक्यों जाते ग़ैरों की बाहों में, मैं भी गर मनचली होती।अब यह एहसास है, वो मुझे देख रास्ते बदलने लगे हैंइन आँखों में डूबे रहते, मेरी आँखें गर नशीली होतीं।मैं भी दिलकश अदाओं से खींच लेती उन्हें अपनी ओर,मेरी यह काया औरों की तरह संगमरमर से ढली होती।