खेत खेत हंसी

लू की आंधी चल रही, धरती का संताप।
पसीने में डूबे सभी, जले भुने तन आप॥

शुरू होते ही नौतपा, पारा पचास पार।
ग्रीष्म आग बरसा रहा, शहर शहर लू मार॥

तेज जहाँ हो नौतपा, हो तीव्र मानसून।
खेत खेत हंसी बिखरे, किसान मोती चून॥

काल तपी भी नौतपा, आत्मसंयम प्रतीक।
धर्म साधना साथ हो, धैर्य रखे सब ठीक॥

भोजन नित ताजा करें, कभी न बासी भात।
व्याधियाँ फटके नहीं, स्वस्थ रहें दिन रात॥

गरमी में सेवन करें, नित्य ही दही छाछ।
खीरा ककड़ी डाभ भी, सत्तू शरबत आछ॥

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