कितने रंग

जब जब मैं गिरा
तब तब तुम हंसे,
उठा, उठने लगा
तुम आक्रामक हुए,
तन कर खड़ा हुआ
तुम कहर बरपाने लगे
और अब-
जब हंस रहा हूँ
तो तुम रिरियाने लगे हो..!

ओ मेरे प्रभु !
आखिर तुमने बनाए हैं
आदमी के
कितने कितने रंग !!