प्रेम यही संसार

अस्पताल सबसे बड़ा, है भीड़ बेशुमार।
बड़े बड़े सब जन यहाँ, दौड़ भाग लाचार।

धनकुबेर सब पंक्ति में, शून्य लगे खामोश।
जाने क्या पल में घटे, सोच सभी मन तोष॥

लहर लहर की जिंदगी, आए सब ही ध्यान।
गम में डूबे चेहरे, टुकुर टुकुर तक आन॥

यहाँ न जाति धर्म रहे, रिश्ता केवल दर्द।
सहानुभूति बांट रहे, सभी सभी से सर्द॥

सरहद दुख की हो नहीं, जुड़े सभी हद पार।
चिंता से चिंता कटे, मिले सुकून अपार॥

‘शिव’ सब अपने ही लगे, यहाँ न कोई भेद।
प्रेम यही संसार हो, सुखी रहे सब खेद॥