नगर नगर ऐलान

सच बात बेधड़क कहे, ऐसा ना अखबार।
चरण सत्ता लोट रहे, तथ्य तोड़ हर बार॥

खबरों की कारीगरी, कर रहे पत्रकार।
हित में पूंजी तंत्र के, काम करे अखबार॥

खबर माल है अब यहाँ, कर उसका व्यापार।
बेच सको तो बेच लो, खबरों का संसार॥

चैनलों पर गरज रहे, एंकर रंग विरंग।
देश में है आग लगी, ऐसे उसके ढंग॥

सत्ता से यारी रखे, सखा बने बाजार।
मिलकर दांत निपोरते, घर-घर दोनों यार॥

गाँव-गाँव में शोर है, नगर नगर ऐलान।
बिकी हुई है मीडिया, शाख न उसकी जान॥