ससुर जी उवाच डॉ अशोक चक्रधर डरते झिझकतेसहमते सकुचातेहम अपने होने वालेससुर जी के पास आए,बहुत कुछ कहना चाहते थेपर कुछ बोल ही नहीं पाए।वे धीरज बँधाते हुए बोले-बोलो!अरे, मुँह तो खोलो।हमने कहा-जी… जी जी ऐसा है वे बोले-कैसा है?हमने कहा-जी…जी ह़महम आपकी लड़की काहाथ माँगने आए हैं।वे बोलेअच्छा!हाथ माँगने आए हैं!मुझे उम्मीद नहीं थीकि तू ऐसा कहेगा,अरे मूरख!माँगना ही था तो पूरी लड़की माँगतासिर्फ़ हाथ का क्या करेगा?