बहुत पहले बहुत पहले
बहुत पहले से भी बहुत पहले
इस असीम अपार अन्तरिक्ष में
घूमती विचरती हमारी धरती
बड़े बड़े ग्रह नक्षत्रों के लिए
एक नन्हा सा चिराग थी
जिसके चारों ओर आग ही आग थी।
बहुत पहले बहुत पहले
बहुत पहले से भी बहुत पहले
जब प्रकृति की सर्वोत्तम कृति
मनुष्य का कोई हत्यारा नहीं था
तब समंदर का पानी भी खारा नहीं था।
बहुत पहले बहुत पहले
बहुत पहले से भी बहुत पहले
जब बिना किसी पोथी के
इंसान एक दूसरे की आँखों में
प्यार के ढाई अक्षर बाँचता था
तो समंदर अपनी उत्ताल लयताल में में नाचता था
लहर लहर बूंद उछलता था
तट पर बैठे प्रेमियों के पैर छूने को मचलता था।
अचानक किसी सुमात्रा में
बेहद कुमात्रा में
धरती की तलहटी कांपी
तो न जाने कौन सी कुलक्षिणी कुनामी
पर कहने को सुनामी लहरों ने बहुत लंबी दूरी नापी।
वो लहरें झोपड़ियाँ मकानों बस्तियों को ढहाकर ले गईं
प्यारे प्यारे इन्सानों को बहाकर ले गईं।
बहुत पहले बहुत पहले
दिल दहले बहुत दहले
जिन्होने भी अपने अपने आत्मीय खोये
वो खूब-खूब रोये।
झोपड़ी के आँसू बहे,
बस्ती के आँसू बहे,
शहरों के आँसू बहे
मुल्कों के आँसू बहे
इतने सारे कि मानो रुके हुए हों सदियों से आँसू
पानी भरो तो मिलें नदियों से आँसू
और जैसे ही व्याकुल सरफिरी पीड़ा का पहला आँसू
समंदर में गिरा
समंदर सारा का सारा
पलभर में हो गया खारा।
बहुत पहले बहुत पहले
बहुत पहले से भी बहुत पहले
सारा का सारा, समंदर हो गया खारा
लेकिन जिंदगी नहीं हारी
बनी रही ज्यों की त्यों प्यारी की पारी
क्योंकि हर गीली आँख के कंधे पर
राहत की चाहत का हाथ था
इंसान का इंसानियत से
जन्म जन्मांतर का साथ था।
फिर से चूल्हे सुलगे
और गरम अंगीठी हो गई
मुहब्बत की नदियां फिर से मीठी हो गईं
फिर से महके तंदूर, फिर से गूँजे और चहके संतूर
फिर से रचे उमंगों के गीत
फिर से गूँजा जीवन संगीत।
शापग्रस्त पापग्रस्त समंदर भले ही रहा खारा का खारा
लेकिन उसने भी देखा हौंसला हमारा
मरने नहीं देंगे किसी को फिर से हम
आ रहे हैं तेरी छाती पर सवारी करने हम
इस बार ज्यादा मजबूत है हमारी नौका
छोड़ेंगे नहीं जीने का एक भी मौका।
