मुझे इश्क हुआ

जबसे हुआ दीदार तेरा तुमसे मोहब्बत सी हो गई,
दिल न रहा वश में मेरे, ये भी तवायफ सी हो गई।

दरिया ए इश्क जैसी है, तुम्हारी ये दिलकश निगाहें
एक बार नजरें क्या मिली तुमसे चाहत सी हो गई।

शिकवा करने गए थे हम, भला किससे करें गिला
तुम्हें भुलाने की जिद की, मगर इबादत सी हो गई।

करना था दरिया पार मगर साहिल पे बैठे रह गए
मौजों को था इश्क तुमसे उनसे बगावत सी हो गई।

काश ! अब ये उम्र गुज़रे बस तुम्हें ही देखते देखते
हसीं चेहरे पे मुस्कान देख अब तेरी आदत सी हो गई।