मोहब्बत कांटों भरी सेज है
मोहब्बत कांटों भरी सेज है गर
चल सको तो चल के आना।
कोमल कदमों में कहीं ज़ख्म
न कर दे ज़रा संभल के आना।
हर किसी की तक़दीर में होता नहीं,
मिलना किसी का प्यार
जिंदगी में लाना हो निखार
शलभ जैसे पहले जल के आना।
कभी सोचा ही नहीं, व्यथित मन को
उकसाती है पागल पवन
चमकने का हो मन बेताब तो
कुंदन के सांचे में ढल के आना।
इस जहाँ का भी भरोसा नहीं
कब तक कोई सफ़र में साथ दे
जब मन में हो विश्वास तो बस
अपने कदमों के बल पे आना।
सच है ये इश्क़ बुलबुला है पानी का,
कब पानी में मिल जाए
जिसने तुमको ताउम्र पाला पोसा
उन्हें न कभी छल के आना।
