दिल का दर्द मैं छिपाऊँ कैसे

जो तुझको मोम कर सके,
ऐसा लफ़्ज़ लाऊँ तो मैं लाऊँ कैसे।
तेरी बेरुखी से दिल जल रहा है,
दिल का दर्द मैं छिपाऊँ कैसे।

छलकता है दर्द आँखों से जब भी,
ये दिल तुम्हे याद करता है,
दवा दे या फिर दे दे ज़हर वरना,
इस दिल को भला बहलाऊँ कैसे।

ज़माना दूसरों की मजबूरियों का,
फायदा उठाता है या हँसता है,
लोग हाथ में नमक रखते है,
उन्हें दिल-ए-ज़ख्म मैं दिखाऊँ कैसे।