देखा करो
सुनो, पल दो पल ही सही, ठहर करके देखा करो
ख़्वाहिश है मेरी, मुझको नज़र भर के देखा करो।
ज़माने का क्या, कुछ भी बोल देते हैं लोग यहाँ
कब तलक रहें हद में, हद से गुज़र के देखा करो।
तुम मुस्कुराती हो तो तुम्हारी बातों से फूल झड़ते हैं
मुझे अदा भरी निगाहों से ज़िक्र करके देखा करो।
जब तुम्हें लगे कहीं मैं नाराज़ न हो जाऊँ तुमसे
देखना ज़रूर, चाहे तिरछी नज़र करके देखा करो।
हर वक़्त की ख़ामोशी सबको अच्छी नहीं लगती
ग़म-ओ-दर्द भुलाने के लिए हँसी-रात करके देखा करो।
कितनी हसीं लगती है यह दुनिया तेरी यादों से ही
दिल ख़ुद बहल जाएगा, मुलाक़ात करके देखा करो।
