प्रिये प्रेम रस भीग-भीग

प्रिये प्रेम रस भीग-भीग

म्हारा तो पिया जिया बौराए गयो
मैं ना कहीयों कहे बालम मेरे नैना
प्रीति प्रेम की पगदण्डी, आबे ना रे चैना
मैं ना कहीयों, पिया रे मैं ना कहीयों
तू बाबरी वो म्हारे मन में रहीयों।

संभले से ना लागे जिया, वो मेरे पिया
का से कहुं वैरना, मोहे नींद ना आवे रैना
तू प्यारी मन की भोरी,जल जावे जिया
वो साजना रे,तैने गिरवी राख लई चैना
वो बाबरी मैं तेरे बीन अब ना रहीयों
बस तू प्यारी प्रेम महर बदरा बन छईयों।

अब ना जी, तेरे बीन अब जी ना लागे
ऐसों तो मैं चातक बन बीन बदरा के प्यासा
तेरी निगोरी पैजनिया बिजली बन चमके
तू थम भी ले मेरे दिल बीच माही जरा सा
मैं चातक, मन मेरो चातक तू प्रेम राग तो गईयों
वो सजना रे तू म्हारे प्रेम रंग रंग जईयो।

प्रिये प्रेम रस भीग-भीग ।