प्रेम रतन धन बरसाना तेरा

प्रेम रतन धन बरसाना तेरा,
धीरे से कंगना खनकाना तेरा,
फिर दिल में मेरे दस्तक दे जाना तेरा,
नयनों का यूं झुक जाना तेरा,
मेरे दिल में हलचल चलती,
मेरे नयनों में फिर चुभ जाना तेरा।

थोड़ी थोड़ी बातों को मीठे-मीठे लमहों में,
मैं जी लूंगा बैरन तू मुझको जीने दे,
धीरे-धीरे तो फिर, घूंघट उठना तेरा।
मुझे तेरे होंठों का जाम तो पीने दे,
मेरे दिल में पल-पल तो धड़कन बढती,
मैं बुलाऊँ तुम्हें, चलते-चलते जो थम जाना तेरा।

तेरे मेरे की तू अब तो बात ना कर,
यूं ही चाहत की झूठी-झूठी बरसात ना कर,
दिल में चाहत का भरा हिमालय देख भी ले,
यूं ही दिल की हरकत में खुराफात ना कर,
मेरे दिल की प्यास जो पल-पल जगती,
मेरी हर हसरत पर बैरी, उलटा-सीधा समझाना तेरा।

अब तो तू हो जाने दे, खो जाने दे हसरत में,
तू तो थोड़ी मान भी ले, आने दे मुझको हरकत में,
तू ऐसी भी नादानी ना कर, ले आज मजा तू जीने में,
और हुस्न मिला दे तू मेरे मीठे मीठे शर्बत में,
प्रेम मेरा तो ऐसा फिर मादक रैना ढलती,
कह दे तू अब अपनी, यूं ही जो शर्माना तेरा।

आज रात को होने पे, मन की मेरे करने दे,
तू बरसात तो करता जा,मोहे मय में खोने दे,
तेरी मादकता जो बरस रही,हसरत मेरी भिगोने दे,
आज जो होना है हो जाए, मोहे इश्क में खोने दे,
तेरा जो जुल्फों को लहराना,नैना मेरे राह तेरी तकती,
थोड़ी थोड़ी हरकत में, घूंघट नही सरकाना तेरा।