डॉ मोहन लाल अरोड़ा
मै एक छोटा सा डाक्टर हमेशा मरीजों के दुख दर्द में रहा और उनकी सेवा मे लगा रहा बदले में मुझे बहुत सारा आशीर्वाद प्यार और धन के इलावा इज्जत और नाम भी मिला। समाज सेवा में जुड़े और सम्माननीय लोगों से मिलना हुआ, लिखने और बोलने का मौका मिला। जिसको मैने दिल से स्वीकार किया और कलम पकड़ कर अपने दिल से लिख डाला। आज आपलोगों के बीच एक कवि के रूप में हाजिर हूँ। दुख और दर्द से दिल का नाता है, इस लिए दर्द भरी रचना मन से लिखी जाती है। आप पसंद करते हैं तो हमारी कलम की धार भी तेज होती हैं और अपनी लेखनी को सफल बनाती है।
