बलजीत सिंह 'बेनाम'
श्री बलजीत सिंह ‘बेनाम’ हिंदी साहित्य जगत के एक सक्रिय और संवेदनशील कवि हैं। काव्य के प्रति उनकी गहरी अभिरुचि और समर्पण उन्हें देश के विविध मुशायरों एवं काव्य संगोष्ठियों में सम्मानित स्थान दिला चुका है। उनकी रचनाएँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। मंचीय काव्य पाठ के माध्यम से उन्होंने श्रोताओं के बीच गहरी छाप छोड़ी है। अनेक साहित्यिक मंचों द्वारा उन्हें उनकी सृजनात्मक प्रतिभा हेतु सम्मानित किया गया है।
जन्म तिथि: 23 मई 1983
शिक्षा: स्नातक
निवास: 103/19, पुरानी कचहरी कॉलोनी, हाँसी,हिसार
दूरभाष: +91 9996266210
बलजीत सिंह 'बेनाम' की गज़लें
- होश में आना भी सीखा तक नहीं
- मोहब्बत यक़ीनन वो करता बहुत है
- बेवफ़ा या बावफ़ा है आईना
- लगे सूरत शिकारी
- अपने चेहरे को आईना करके
- तेरे होंठों पर कहानी और कुछ
- होता है नूरानी मंज़र
- अगर पास हक़ की क़माई नहीं है
- तुझको देखूँ तो सीने में हलचल हो जाए
- जी भर के मुफ़लिसों को रुलाया है आपने
- तसव्वुर में चेहरा निहारा बहुत है
- आदमी के लिए है क्या औरत
- उसे पाने को बेघर हो गए हैं
- दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी
- दो दिलों को क़रीब आना है
