वेदुला वेंकट रमणा 'किरण'
वेदुला वेंकट रमणा ‘किरण’ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में निवास करने वाले एक संवेदनशील समकालीन कलाकार और प्रयोगधर्मी कवि हैं, जिनकी रचनाएँ प्रकृति, स्मृति, राजनीति, मनुष्य की आंतरिक यात्रा और सामाजिक विडंबनाओं को गहरे रूपक और बहुरंगी बिंबों के माध्यम से व्यक्त करती हैं। 1995 में जिला युवा अवार्ड, 2005 में बिलास शिल्पी सम्मान, तथा 2017 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज अपनी अनूठी कलात्मक उपलब्धि—सिर्फ एक मिनट में 16×20 इंच कैनवास पर हाथों से ‘The Mother’ की चित्र-रचना—के कारण वे दृश्य और शब्द–दोनों कलाओं में समान रूप से पहचान रखते हैं।उनकी कविताएँ “दरवाज़े के बाहर निकलो”, “छत को छूकर देखो”, “स्याही, सत्ता और शवपत्र”, “अमरूद और स्मृति” आदि मानव अनुभव के उन बारीक क्षणों को पकड़ती हैं जहाँ वास्तविकता और कल्पना एक-दूसरे में विलीन हो जाती है। ‘किरण’ अपनी कला और लेखन दोनों में परिवर्तन, संघर्ष, स्मृति, लोकतंत्र और अंतरमन की बेचैन रचनात्मकता को केंद्र में रखकर एक ऐसा संसार रचते हैं जहाँ पाठक स्वयं को भी खोजने लगता है।
