राजनंदिनी रावत

राजस्थान की लोकप्रिय कवयित्री राजनंदिनी रावत की कृतियां समकालीन हिंदी साहित्य में एक प्रखर, बेबाक और उच्च-स्तरीय वैचारिक हस्तक्षेप है। उनका शिल्प कृत्रिम अलंकारों से मुक्त, मुक्त छंद की आंतरिक लय से समृद्ध और सीधे चेतना पर प्रहार करने वाला है। साहित्यिक धरातल पर वे स्त्री-विमर्श को सतही बंधनों से उठाकर गहरे दार्शनिक और अस्तित्ववादी संकट से जोड़ती हैं। पौराणिक प्रतीकों और आधुनिक मनोवैज्ञानिक बिंबों का अनूठा अंतर्गुंफन उनकी लेखनी को एक कालजयी गंभीरता देता है। भाषा की मारक सपाटबयानी और वैचारिक परिपक्वता के कारण उनकी शैली समाज के दोहरे मापदंडों को छिन्न-भिन्न करती है।